संभोग के दौरान: एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ बिना सुरक्षा (कंडोम) के संबंध बनाने पर वायरस का संक्रमण हो सकता है। ये योनि, गुदा और मुख मैथुन के दौरन हो सकते हैं। रक्त के माध्यम से: एचआईवी से संक्रमित रक्त या रक्त के उत्पादों के प्रवेश से भी एचआईवी हो सकता है। यह अक्सर सांसर्गिक रक्त प्रदानन (रक्त आधान), संक्रामित सुई (सुइयों) का पुन: प्रयोग है, या संक्रामित उपचार के लिए अवश्य ही इस्तेमाल किया जा सकता है। माँ से बच्चे में: एचआईवी संक्रमण माँ से बच्चे में गर्भस्थ शिशु के दौरान, प्रसव के समय, स्तनपान के माध्यम से हो सकता है। सुजाग रशैया (सुई साझा करना): ड्रग्स इंजेक्शन करते समय संक्रमण सुई या इंजेक्शन का उपयोग करना भी एचआईवी के प्रसार का एक बड़ा कारण है। ग्रहित (अंग प्रत्यारोपण): अगर संक्रामित व्यक्ति का अंग किसी दूसरे व्यक्ति में रोपन किया जाता है तो एचआईवी हो सकता है। सुरक्षा और सतर्कता के उपाय अपनाकर इस वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है। इनमें कंडोम का उपयोग, एचआईवी टेस्ट और समय पर चिकित्सा लेना शामिल है।

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